दिल्ली विधानसभा चुनाव अब आम आदमी पार्टी और उसके पूर्व सदस्यों के बीच एक युद्ध का आकार लेता दिख रहा है । अभी तक राजधानी में जारी चुनावी लड़ाई में सबसे आगे रहने वाली असली भाजपा अब कहीं कोने में सिमटती दिख रही है। हाल ही में बीजेपी द्वारा 'आप' के सदस्यों को पार्टी में शामिल करना एक सोच-विचारकर उठाया गया कदम है लेकिन इससे कहीं न कहीं हताशा का संकेत भी मिलता दिख रहा है।पिछले कुछ दिनों में तेजी से बीजेपी में सदस्यों का शामिल होना, मुख्यतः 'आप' के नेताओं का, पार्टी के कुछ अनाकर्षक मुद्दों को उजागर करता है।सबसे पहले, अन्य दलों के ऐसे नेताओं को पार्टी में जोश और उत्साह के साथ शामिल करना जिन्हें जनता ने पहले ही नकार दिया है, साफ़ दर्शाता है कि पार्टी के पास खुद की बहुत ज्यादा सूख चुकी शाखाएं हैं और वे इसमें कुछ नहीं कर सकते। शाज़िया इल्मी और विनोद कुमार बिन्नी जैसी पसंद अपने दम पर ज्यादा वज़न नहीं उठा सकते, उन्हें मिलने वाला मीडिया का ध्यान उनकी राजनीतिक छवि के मुकाबले कहीं अधिक है। पार्टी में इन्हें शामिल करने का यदि एकमात्र उद्देश्य केजरीवाल की पार्टी पर कीचड़ उछालना है, तो इससे मात्र यही साबित होता है कि दिल्ली में भाजपा अपने विचारों से बाहर चली गयी है। साथ ही, यह प्रतिद्वंद्वी दल को टक्कर देने में पार्टी की असमर्थता और अपने दल के नेताओं में आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है।
दूसरा यह कि पार्टी मानती है कि, द्वेषता के चलते ही सही, आप अन्य दलों की तुलना में बहुत होशियार है इसलिए उसके प्रति दृष्टिकोण अलग होना ही चाहिए।
to be continued........
मीनाक्षी उनियाल