5 Aug 2013

दुर्गा शक्ति नागपाल की दुर्दशा के लिए केवल नेताओं को दोष न दें



   दुर्गा शक्ति नागपाल के लिए झूठे आंसू क्यों? क्या हम सच में कोई परवाह करते हैं? अगर हम करते भी हैं तो शायद देश के सबसे बेहतर समय यापन के माध्यम राजनीति में ही उलझकर रह जाते हैं और इससे परे कुछ सोच ही नहीं पाते। दुर्गा शक्ति नागपाल पहली ऐसी ईमानदार अफसर नहीं जिन्हें सत्ता संभाले हुए लोगों का शिकार होना पड़ा हो और न ही वे आखिरी ही होंगी। लेकिन अगर किसी ने पीछे मुड़ के ऐसी ही पहले घटित हुई कुछ घटनाओं पर गौर किया हो तो ये स्वयं ही ज्ञात हो जाएगा कि जनता का गुस्सा मात्र तमाशा भर है।  यदि हम वास्तविक तौर पर इस सम्बन्ध में गंभीर हैं तो हमारे पास एक ईमानदार व्यक्ति को राजनीतिक वर्ग और भ्रष्ट वर्ग के अफसरों से बचाने के लिए एक तराशी हुई और पूर्णतः स्पष्ट व्यवस्था है।
   जब एक ईमानदार अफसर शिकार बनता है तो हमारी पहली प्रतिक्रिया राजनीतिज्ञों पर शिकंजा कसने की होती है। वे देश के सबसे प्रिय पंचिंग बैग हैं। कहीं भी कुछ भी गलत होता है तो उन्हें काफी भारी भरकम व लम्बा पंच मार दिया जाता है। यह हमारे भीतर से आत्मग्लानि का भार निकालने में सहायक तो होता ही है साथ ही हमें  और हमारे व्यक्तित्व को सुन्दर और अंतर्विवेकशील भी बनता है। ये भी सच है की हम अपने जैसे और अपने से सम्बंधित साथी अथवा ब्यूरोक्रेट्स की हो रही आलोचना पर मूक होकर निर्भीकता त्याग देते हैं। उस समय ये सोचा जाता है कि यह तो सम्बंधित वर्ग द्वारा की जाने वाली प्रतिक्रिया है।  क्या वे लोग हम में से ही नहीं हैं? स्पष्ट रूप से कहा जाए तो हम सभी अविश्वसनीय रूप से पाखंडपूर्ण व्यवहार करने वाले लोग हैं।
        
                                                                                
                                                                                            मीनाक्षी उनियाल




एक गलती...

एक गलती की तन्हाई में
जो उस हस्ती से मिल बैठे,
राहगुजर होकर न जाने क्यों
सड़क किनारे जा बैठे,
एक सवार को रोककर यूँ ही
अपना ही पता पूछ बैठे,
ये खता हुई हमसे न जाने क्यूँ
अनजान राही संग जो चल बैठे,
अपने भी थे रंग कई फिर भी
न जाने क्यों उसका रंग ले बैठे,
एक गलती की तन्हाई में
जो उस हस्ती से मिल बैठे...
                                                                 मीनाक्षी उनियाल