7 Nov 2013

क्या कहूँ क्या हूँ मैं ...

क्या कहूँ क्या हूँ मैं ...
एक कण एक आवाज हूँ मैं
एक बिखरी हुई माला का
अनछुआ तार हूँ मैं
क्या कहूँ क्या हूँ मैं ...
धरातल में अंकुरित बीज हूँ
या कहूँ सीपी का मोती हूँ मैं
पारदर्शी छाया का
छुआ हुआ साज़ हूँ मैं
क्या कहूँ क्या हूँ मैं ...
छिपा हुआ कीमती सामान हूँ मैं
अलग खुद का एक आकाश हूँ
अँधेरे में भ्रम का साथ हूँ
हर इंसां का एहसास हूँ मैं
क्या कहूँ क्या हूँ मैं ...
                मीनाक्षी उनियाल