आज कुछ तन्हाई सी थी चारों ओर ... कारण तो कुछ भी नही था। काफी सोचने पर भी श्रेया को अपनी उदासी और आसपास फैली तन्हाई की परतों के पीछे कोई कारण नहीं मिला... कहीं न कही कोई तो कारण शायद था। नहीं तो हमेशा चहकने वाली श्रेया अचानक यूँ अकारण ही गुमसुम न हो जाती। ऐसे में श्रेया ने अपने को संभाले केबिन में ही व्यस्तता ना होते हुए भी खुद को काम में तल्लीन करने के खूब प्रयास किए। लेकिन कहीं न कहीं वो इन प्रयासों में विफल सी हो रही थी।
श्रेया की इस ख़ामोशी को साथ के अन्य कई कर्मचारियों ने भी महसूस किया था। हर मीटिंग में एक आध सुझाव देने वाली ये लड़की आज अचानक आधे में ही उठ खड़ी क्यों हुई और सब अधर में ही छोड़ क्यों ऑफिस से चली गयी, कोई नहीं जान पाया था पर सबको श्रेया की भावभंगिमाएं कुछ अटपटी सी जरुर लगी थी। लेकिन ना ही किसी ने पूछने की गुस्ताखी की और ना ही पीठ पीछे बातें बनाने से ही खुद को रोक पाए। सभी को लगा कि शायद उसे किसी अपने से धोका मिला है या फिर उसका कोई अपना उसे छोड़ गया है। जितने लोग उतनी बातें ... किसी के मुंह को कौन बंद कर सकता था। आज सभी के पास पहली बार श्रेया की बातें बनाने का मौका था क्योंकि इससे पहले उसने अपनी हाजिरजवाबी, समझदारी, कर्तव्यनिष्ठा से कभी भी किसी को भी ऐसा मौका ही नहीं दिया था।
श्रेया तूफ़ान की तरह ऑफिस से बहार आ चुकी थी और अपनी कार के दरवाजे के सामने आकर ठिठक-सी गयी थी। अचानक सूर्य की किरणों की तपन अपने पर महसूस हुई तो नज़रें स्वत: आसमान की ओर उठ गईं। आज मौसम साफ़ था लेकिन श्रेया को आसमान में मिट्टी-सी दिखाई पड़ रही थी। कुछ सोचे बिना ही कार में बैठ तो गयी लेकिन उसकी बिना बात की झुंझलाहट
न जाने क्यों उसका पीछा नहीं छोड़ रही थी। पहले हाथ ये सोच के एफ एम को चलाने के लिए बढ़े की शायद नए पुराने गाने उसका मन बहला पाने में सफल होंगे ...
" दिल मेरा चुराया क्यों ... जब ये दिल तोड़ना ही था ... हमसे दिल, लगाया क्यों, हमसे मुंह मोड़ना ही था ... आंखू में आंसू छुपे थे कहीं .... इनको छलकना तूने सिखाया" गाने के इन शब्दों के साथ श्रेया का अंतर्मन छल्ली होते हुए आँखों को पानी से लबालब कर कुछ ही देर में आंसुओं का सैलाब बन ज्वालामुखी की तरह फुट पड़ा
तभी अचानक गाना रुक और आर जे के "दुकानदार तो मेले में लुट गए यारों
तमाशबीन दुकानें लगाए बैठे हैं "
के ये शब्द सुनाई दिए, लगा उसी का हाल-ए-दिल बयां किया जा रहा है वो भी लाइव ......
मीनाक्षी उनियाल