1 Dec 2012

Pair of Beautiful Eyes...

The eyes saw.......
But I ignore...........
They want something....
I really want the same...!!!!
But there's something in between...
I can't do the whole thing...
And those EYES continuously gazing...
Now that gaze look friendly..!!!!!
I am not understanding the EYES..????
May be something wrong comes in my mind..
But both pair of EYES play hide and seek...
And this game continue till i see..
But then there's an end came...
And atlast those EYES separate..!!!
May be the journey is over..!!!
And they don't want to live forever...
But those EYES i found very beautiful...
Separation from those was very regretful
I never forget those cute EYES....
AS those pair of eyes had the whole sky.....!!!!


                                                                                                           Meenakshi Uniyal

Undefined Emptiness


That loneliness teaches me a lot
That emptiness fills in me a thought
Thoughts on paper soothes mind
And encourage me to think and write
When I got some appreciation
I began to think with different dimension
Hope…. Who reads …understands me
And share “that loneliness” with me….
But there’s a positivity in writing
Both words and me do whole night fighting…
Then comes a poem undefined…..
That’s a result of curiosity in my mind…….
Then I learn to live in loneliness…..
And my poem filled my “emptiness”……….!!!!


 Meenakshi Uniyal

21 Oct 2012

स्वतंत्रता के बदलते मायने

  इस वर्ष हम स्वतंत्रता के 65 साल पूरे कर चुके हैं। यह हम सब जानते हैं कि अंग्रेजों की गुलामी की बेडि़यों से हमें इस दिन स्वतंत्रता सेनानियों ने किस शिद्दत के साथ अपने प्राणों की कुर्बानी देकर आजा़द करवाया था। यह आज की युवा पीढ़ी शायद ही समझ पाए कि आज के दिन का महत्व केवल देश भक्ति गीत गााकर या सुनकर या देश भक्ति नाट्य प्रस्तुति करने मात्र से पूर्ण नहीं होगा। अपितु स्वतंत्रता दिलाने वाले शहीदों के द्वारा अपने देश की गरिमा व मान-सम्मान को अपना मानकर उसकी प्रतिष्ठा बनाने से सिद्ध होगा।

    यदि हम अपनी युवा पीढ़ी की शिक्षा में विदेशी गुणों व नियमों की अपेक्षा अपनी संस्कृति के विचार व पारिवारिक संस्कार पर अधिक बल देंगंे तो हम अपनी सांस्कृतिक और संस्कारी धरोहर को बचाने में सफल होंगे। एक युवा होते हुए मैं खुद यह सोचने पर मजबूर हूं कि क्या हम जिस राह पर अग्रसित हैं वह सही दिशा की ओर जा रही है? किंतु इसका उत्तर हमें अपने विचारों को तराशकर अपने ही अंदर खोजना होगा। ’देश ने क्या किया’ इसका उत्तर चाहने वालों को ’हमने देश के लिए क्या किया’ इस प्रश्न को हल करना होगा। देशवासी ही अपने कार्यों से देश की गरिमा व उसकी प्रतिष्ठा बनाते हैं। इसलिए देश के नागरिक होते हुए हमें स्वयं ऐसे कार्य करने होंगे जिससे हम इसकी उन्नति में योगदान दे सके। और मुझे यह पूर्ण आशा भी है कि हम सब के भीतर कहीं न कहीं देश के प्रति कुछ करने की छोटी ही सही किंतु कुछ चिंगारी तो है जिसे बस हमें ख्ुाद से अवगत करवाना है। हमें जो कुछ भी मिल रहा है सब देश का ही है जिसे अपने कर्तव्य की भांति हमें लौटाना भी है।

                                                                                                                                   मीनाक्षी उनियाल


18 Oct 2012

गूढ़ रहस्य

 गूढ़ रहस्य



जीवन के इस गूढ़ रहस्य को 
कौन समझा है मित्र आजतक
क्यूं पीड़ा फिर तुम्हें अकिंचन
बढ़ चलो तुम भी अपने पथ पर
व्यथा जिसे कहते हैं व्यक्त कर
मात्र भ्रम है माया का मित्रवर
बस अपना तुम नीति ज्ञान कर
रखो वेदना अपने ही भीतर
तुम भी तो कल देख बूझ कर
अग्रसित होंगें जीवन के पथ पर
फिर क्यों अपने को वेदित कर
व्यर्थ कर रहे सुनहरा कालचक्र
जीवन के इस गूढ़ रहस्य को
अब खोज रहे अपने ही भीतर


               मीनाक्षी उनियाल